मनविराम.



 मनविराम


मैं झुकने लगी हूँ वैराग की तरफ

याद आती है कभी-कभी

उन बीते दिनों की..

जहाँ मैंने

अपने आप को देखा था

बहार के साथ झूमते हुए…


फूलों की महक में

कुछ अधूरी हँसी थी मेरी,

तितलियों की उड़ान में

एक अनकहा सपना भी था...


अब शांत हूँ,

ठहरी हुई,

जैसे कोई नदी तपस्विनी हो गई हो..

बहती तो है,

पर भीतर सबकुछ त्याग चुकी हो।


मन की शाखों पर

अब वसंत नहीं उतरता,

बस एक मौन छाया रहता है

जो कहता है —

"अब लौटना मत,

तू बहुत दूर आ चुकी है…"


                                         - तेजश्री शिंदे ✍️ 

Comments

  1. अभी तो बहुत दूर तक जाना है....you are unstoppable...

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  2. Journey 👏👏👏👏

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  3. यह दुनिया कहने को तो अपनो का मेला हे,
    ध्यान सें देखो तो यहा हर शक्स अकेला हे...!!

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  4. Heartfelt feeling

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  5. ह कविता बहुत ही सुंदर, गहराई से भरी और आत्मानुभूति की छाया लिए हुए है। तेजश्री शिंदे की यह अभिव्यक्ति एक भावनात्मक यात्रा है — बीत चुके उल्लास से लेकर वर्तमान वैराग्य तक।

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  6. Felt like sitting in a garden after rain has stopped. Cool air, muddy rainy fragrance. Too Good mam.

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  7. भीतर सब कुछ त्याग चुकी
    खुप छान

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  8. Kya baat hai dil ko choo gayi ❤️

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  9. खूपच सुंदर

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  10. बहुत खूब लिखा है..... मन बहुत चंचल होता है इसका जवाब अपने दिया है हसी मजाक से ही जिंदगी अच्छी तरह से गुजरती है....

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  11. Dr. Manjula Biswas17 July 2025 at 13:13

    Wow...that's awesome. Very deep and reflective ❤️❤️❤️

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  12. अतिसुंदर मस्त कविता आहे संयम हीच जीवनातील खरी परीक्षा आहे.

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  13. Aatmvishwas la vadavnari hi kavita tumhi atishay sopya sabdane lihun khup chan lihlay ❤️🧿

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  14. खुप सुंदर, मनाच्या कोपऱ्यात दवाचा थेंब पडावा‌ . आणि तो तसाच जपून ठेवावा आयुष्य इतकी नाजुक पण आयुष्याची खरी ओळख सांगणारी .

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  15. Awesome and Very painful 💐

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  16. मंगेश19 July 2025 at 19:41

    मन बैरागी हो तो कोई ग़म नहीं
    अतीत के सुनहरे पल तो संग हैं
    एक जीवन का अंत ही तो
    दूसरे जीवन का आरंभ हैं

    यही दर्शानेवाली आपकी यह रचना हैं, तेजू..
    अंतर्मुख करनेवाली.. सुंदर! 👌👌👌

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