सुंदरता (कविता)
सुंदरता
बहुत सुंदर दिखते हो तुम...
उस तरह नहीं
जैसे सुंदरता बताई जाती है,
बल्कि उस तरह
जैसे अचानक
दिल भर आता है।
जैसे किसी हँसी के बीच
आँखें भीग जाएँ,
और वजह पूछने का
मन ही न करे।
तुम्हें देखते ही
कुछ संभलता नहीं,
कुछ बिखरता भी नहीं—
बस
अंदर कहीं
एक हल्की-सी कसक
जाग जाती है।
तुम बोलते हो
तो शब्द नहीं चुभते,
धीरे-धीरे
मन के कोने में
जगह बना लेते हैं।
और जब तुम सुनते हो,
तो लगता है
मेरी हर अधूरी बात
पहले से ही
तुम्हें पता थी।
तुम्हारे पास होने में
कोई दावा नहीं,
फिर भी
दिल खुद को
थोड़ा और तुम्हारा
मान लेता है।
शायद इसलिए
तुम्हारी याद
कभी बेचैन नहीं करती—
बस
चुपचाप
साथ चलती है।
क्या कहूँ...
सुंदरता अगर
किसी एहसास का नाम है,
तो
बहुत सुंदर दिखते हो तुम—
हर बार
जब बिना वजह
दिल भर आता है।

वाह ... प्रिय....प्रियतम...और ये सुंदरता!
ReplyDeleteNice mam 👍
ReplyDeleteकिती अलगद... तरल आणि सहज लिहिले आहेस तेजू. भावनांची जादूगर आहेस तू. तुझे शब्द जिवंत होऊन समोर उभे राहतात.
ReplyDeleteThank you 😊
Deleteकिती साधीर, तरल शब्दरचना पण मनाला चटकन भावणारी....♥️😍♥️
ReplyDeleteWaah...you are that kind of Sunder Di...ye kavita aap pe puri satik baithti hai.. Love you Di..❤️❤️😘
ReplyDeleteमनातील अंतर्भावाचा अलगत सूर भावस्पर्शी शब्दातून आविष्कार......
ReplyDeleteएखाद्याचे सुंदर मन असेल तर बाह्य सौंदर्य त्याच्यापुढे फिके पडते.
ReplyDeleteबहुत सुंदर दिखते हो तुम—
हर बार
जब बिना वजह
दिल भर आता है।
त्याच्या सौंदर्याची उपमा मन भरून येण्याला दिली आहेस.... काय शब्दांची कमाल आहे teju वाह..! तू लिहिताना "तो"आपसूकच डोळ्यासमोर येतो.
Thank you 😊
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