सुंदरता का मौन... एक एहसास!

सुंदरता का मौन


संभव नहीं था प्रेम के बिना

सुंदरता का अर्थ समझना,

जैसे भोर की पहली किरण में

रात का सारा मौन घुल जाता हो,

या जैसे बरगद की छाँव में

थका मुसाफिर सुकून पा जाता हो।


वो आँखों में उतरकर दिल तक पहुँचा,

जैसे सावन की बूंदें प्यासी धरती को सहलाती हों,

या जैसे जलते दीपक की लौ में

अंधकार खुद को सजा लेता हो।


हर रूप में सौंदर्य ऐसा रचा,

जैसे टूटते तारे ने मन की गहराइयों में

एक अनकही दुआ छोड़ दी हो,

या जैसे किसी अनजान राह में

अचानक अपना सा कोई मिल गया हो।


शब्द मौन हो गए एहसास के आगे,

जैसे मंदिर के घंटों में घुली प्रार्थना,

और धड़कनों ने तस्वीरें बना दीं,

मानो मन के आँगन में

कोई पुरानी स्मृति फिर से महक उठी हो।


प्रेम ने सिखाया कि सुंदरता,

सिर्फ देखने में नहीं, महसूसने में बसती है,

जैसे मन के कोने में छिपा अधूरा सपना,

या आत्मा की आँखों से उजागर हुआ सत्य।


                                            - तेजश्री शिंदे ✍️



Comments

  1. ज़िन्दगी किसी भी दौर से गुजरे
    मुस्कुराहट को लबों से जुदा ना करें,
    ख्याल सबकी खुशी का रखें
    मगर कभी खुद को खुद से खफा ना करें...

    प्रेम जिना सिखाता है और प्रेम गैरो को ही अपना बना देता है... प्रेम की कोई परिभाषा नही होती प्रेम सिर्फ प्रेम होता है...

    ReplyDelete
  2. Excellent 👍👌
    Very True

    ReplyDelete
  3. Khoop sunder अप्रतिम

    ReplyDelete
  4. Khup chan kavita

    ReplyDelete
  5. Bahut khub . Keep it up .isse aur achcha likho yahi shubanaye

    ReplyDelete
  6. बहुत सुंदर ❤️

    ReplyDelete
  7. अति सुन्दर "सुंदरता"💞

    ReplyDelete
  8. यदि कौई तुम्हारे चेहरे पर लिखी
    उदासी की अदृश्य
    पटकथा पढ सकता है...
    तो यकीनन
    वह तुम्हारे प्रेम के योग्य है...!

    ReplyDelete
  9. अति सुंदर ❤️

    ReplyDelete
  10. तुमच्या आयुष्यात असो सुखाचे क्षण कधी न यावे दु:ख कायम तुम्ही असावे आनंदी ❤🙂

    ReplyDelete
  11. खुप सुंदर

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

अलक ( एक सुंदर लेखनप्रकार )

अजूनही भटकते आहे..(गझल)

माणूस ओळखून ठार मारले गेले.