तरंगी....प्रेम की अनमोल अनुभूती..!




 

 तरंगी


                                  किनारे दर किनारे                                

     गुमशुदा मोहब्बत को गुहार लगाती 

     मैं ढूंढ रही थी समय की चक्र का पहिया 

     जो कभी उलटा घुमताही नहीं...


     तूने शहर बदला, बदली शहर की हवा

     अब पहले जैसा यहां कुछ नहीं रहा

     शरीर सासों की माँग नहीं करता 

     तेरा आना अब कोई इत्तफाक नहीं लगता...


     उतरती धूप की पतझड़ हवा के झोंकों से 

     सूखे पत्तों को बिखेरती रही...और में 

     सिरहाने समुंदर का तकियाँ लिए सोती रही 

     मोसम बदलने के इंतजार में...


     यहां का मोसम तरंगी 

     हर गली यहां की संकरी 

     तेरा पता नहीं मिलता 

     अब कोई रास्ता नहीं चलता...


     किनारे दर किनारे 

     गुमशुदा मोहब्बत को गुहार लगाते ।


                                               - तेजश्री शिंदे ✍️


Comments

  1. Dr. Manjula Biswas5 January 2025 at 07:39

    The words in the poem strike a cord in the heart. You are the best sweetheart 😘

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  2. बहुत सुन्दर ❤️

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  3. खूप छान 👌👌👍👍

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  4. Heart touching words💕

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  5. Awesome... It's amazing.... Hame teri mohhabat ka sahara mil gaya hota.... Hya song chi eka kshanat aathavan aali... Nice kavita 👌🏽👌🏽👌🏽👌🏽👌🏽

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  6. Beyond words ❤️

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  7. This is such a beautiful and evocative piece, Tejashree! The way you’ve captured the feeling of longing and the changing seasons is powerful. The imagery of the city, the love lost, and the wait for a change is really moving.

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  8. प्रीती5 January 2025 at 11:04

    बहुत ही सुंदर और भावनात्मक है, आपने जो तन्हाई और बदलाव की भावना व्यक्त की है, वह बहुत गहरी है। शहर, खोई हुई मोहब्बत और बदलाव का इंतजार करते हुए जो चित्र आपने खींचा है, वह दिल को छू जाता है।😍😍😍

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    1. बहुत शुक्रिया प्रीती जी 😊

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  9. Awesome just heart touching poem 😍❤

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  10. जाने कैसी ये आबो हवा है
    हर तरफ सिर्फ धुआँ ही धुआँ है
    जिन्दगी पर छाया है गमों का कुहासा
    न जाने ऐसे में तू कहाँ है ?

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    1. कितना मुश्किल है
      जिंदगीभर
      इस अंदाज में
      सब्र करना
      तुम्ही से फासला रखना और
      तुम्ही से इश्क़ करना...!! - गुलज़ार

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  11. waah kya baat hai mamji kitni badhiya likhawat hai.........kiski yaad mein pyaar mein koi behtaa jaa raha hai ....waah....
    जाने कैसी ये आबो हवा है
    हर तरफ सिर्फ धुआँ ही धुआँ है
    जिन्दगी पर छाया है गमों का कुहासा
    न जाने ऐसे में तू कहाँ है ?

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  12. इंसाने जिंदगी का सबसे खूबसूरत उतनाही दर्द भरा एक अहमद पहलू मोहब्बत है. न जाने इस मोहब्बत में कितने दीवाने हुए कितने परवाने. मोहब्बत में मिलने की बिछडने की इंतजार की घडी आती है. बिछडने के बाद गुमशुदा मोहब्बत को पुकारणे का समय भी आता है. ओ तन्हाई ओ बेचैनी, उसकी यादो मे गुजरी दिन रात, और उसकी काही हुई हर बात. जिसने भी कभी मोहब्बत की है उसे आपकी इस कविता का हर लब्ज मानो एक मोतीसा लगेगा. हर बार की तरह इस बार भी आपने शब्दों की मला को कुछ इस तरह फिरोया है मानव कविता मे से मेरी ही भावनाये उमडकर बहार आ रही हो. और ज्यादा कुछ नही अंत मे बहुत खूब तेजू....अझहर...

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