ठहराव.. एक मुकम्मल आस!


 ठहराव 


बदला बदला-सा मोसम है
और कुछ बदले से हम..
भोर विभोर तल्लीनता में
कुछ मशगूल से हम..

उठती कशिश लालिमा-सी
ह्रदय पीड़ा से झकझोर..
हर एक हो रंग मिश्रित
मानो इंद्रधनू हर ओर..

एक एक-सा भावार्थ है
और कुछ उलझे से हम..
आज भी याद करते है
मानो मजबूर से हम..

ज़िन्दगी उतार चढ़ाव-सी
ठहराव चाँद सा दूर..
कल कल बहती सरिता
ढूँढे सागर का छोर..

बदला बदला सा मोसम है
और कुछ बदले से हम..

                                                - तेजश्री शिंदे ✍️ 

Comments

  1. बहुत खूबसुरत लिखते हो आप
    ऐसे ही लिखते रहो दिल की बात

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  2. Deep words...😌

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  3. Ek number madam 😍

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  4. Awsome , shabdanchi mala kashi masta perli aahes

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  5. Amazing and Innovative Post

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  6. You've expressed well

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  7. Your verses are windows to the soul, blending life, love, and purpose effortlessly.

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  8. 😍😍😍😍😍

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  9. शब्द अन शब्द खूप खोल लिहिला आहे
    खूप छान ताई खूप मस्त line आहेत ❤️❤️

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  10. ओ बदलना और बदलने मे, खुद को परखते गये,
    खुद मे समया हुआ सबकुछ , रंगोमें तराशते गये । 😊🌹

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  11. Superb 😍😍😍😍

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  12. Just amazing😍

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  13. Your poems are truly beautiful and profound. Each one speaks directly to my heart, evoking deep reflections on life and the past.

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  14. Mastch...shabdrachana kadakkk

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  15. बहुत बढ़िया तेजू! दिल के जज्बातों को बेहतरीन अल्फाजों में पिरोकर पेश करने का आपका अंदाज़ बड़ा अनोखा हैं!
    बदलाव कुदरत का नियम हैं पर उस बदलाव को कबूल करना कभी-कभी नामुमकिनसा हो जाता हैं और फ़िर शुरु हो जाती हैं जज्बातों की कश्मकश! अतीत के वो लम्हें यादें बनकर दिल को झिंझोडते हैं..

    दिल ठहराव चाहता हैं
    और वक़्त ठहरता नहीं
    बीते लम्होंको करों याद जितना
    दिल कभी भरता नहीं

    मौसम आते हैं ज़ज्बात लेकर
    और जाते हैं मीठी यादें देकर
    हम तो थोड़ा जी लेते हैं
    उन्हें याद करके मुस्कराकर..
    😊😊😊

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    1. क्या बात है... मंगेश! कविता की प्रशंसा और एक कविता ही हो सकती है... thank you 😊

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