ठहराव.. एक मुकम्मल आस!
ठहराव
बदला बदला-सा मोसम है
और कुछ बदले से हम..
भोर विभोर तल्लीनता में
कुछ मशगूल से हम..
उठती कशिश लालिमा-सी
ह्रदय पीड़ा से झकझोर..
हर एक हो रंग मिश्रित
मानो इंद्रधनू हर ओर..
एक एक-सा भावार्थ है
और कुछ उलझे से हम..
आज भी याद करते है
मानो मजबूर से हम..
ज़िन्दगी उतार चढ़ाव-सी
ठहराव चाँद सा दूर..
कल कल बहती सरिता
ढूँढे सागर का छोर..
बदला बदला सा मोसम है
और कुछ बदले से हम..
- तेजश्री शिंदे ✍️

बहुत खूबसुरत लिखते हो आप
ReplyDeleteऐसे ही लिखते रहो दिल की बात
Thanks Doctor 😊
DeleteDeep words...😌
ReplyDeleteEk number madam 😍
ReplyDeleteAwsome , shabdanchi mala kashi masta perli aahes
ReplyDeleteAmazing and Innovative Post
ReplyDeleteYou've expressed well
ReplyDeleteYour verses are windows to the soul, blending life, love, and purpose effortlessly.
ReplyDelete😍😍😍😍😍
ReplyDeleteशब्द अन शब्द खूप खोल लिहिला आहे
ReplyDeleteखूप छान ताई खूप मस्त line आहेत ❤️❤️
ओ बदलना और बदलने मे, खुद को परखते गये,
ReplyDeleteखुद मे समया हुआ सबकुछ , रंगोमें तराशते गये । 😊🌹
Thanks Dnyaneshwar😊
DeleteSuperb 😍😍😍😍
ReplyDeleteJust amazing😍
ReplyDeleteYour poems are truly beautiful and profound. Each one speaks directly to my heart, evoking deep reflections on life and the past.
ReplyDeleteThanks dear 😃
DeleteVery nice
ReplyDeleteMastch...shabdrachana kadakkk
ReplyDeleteबहुत बढ़िया तेजू! दिल के जज्बातों को बेहतरीन अल्फाजों में पिरोकर पेश करने का आपका अंदाज़ बड़ा अनोखा हैं!
ReplyDeleteबदलाव कुदरत का नियम हैं पर उस बदलाव को कबूल करना कभी-कभी नामुमकिनसा हो जाता हैं और फ़िर शुरु हो जाती हैं जज्बातों की कश्मकश! अतीत के वो लम्हें यादें बनकर दिल को झिंझोडते हैं..
दिल ठहराव चाहता हैं
और वक़्त ठहरता नहीं
बीते लम्होंको करों याद जितना
दिल कभी भरता नहीं
मौसम आते हैं ज़ज्बात लेकर
और जाते हैं मीठी यादें देकर
हम तो थोड़ा जी लेते हैं
उन्हें याद करके मुस्कराकर..
😊😊😊
क्या बात है... मंगेश! कविता की प्रशंसा और एक कविता ही हो सकती है... thank you 😊
Delete👌👌👌
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