तुख़्म-ए-इश्क़ (गझल)



तुख़्म-ए-इश्क़ 


आज हमने जाना मन की ज़हमत किसे कहते है,

किसी अपने को अपना ना कहना अज़ाब-सा खलता है ।


बेताब दिल को तेरा इंतजार तो ज़रूर रेहता है,

किसी वक्त वो पूरा मेरा था ये सोचना ख़्वाब-सा लगता है। 


तेरा मिलना तुझमें मिल जाने का सबब सा लगता है,

तुख़्म-ए-इश्क़ का दिल मे जगना खल-सा लगता है।


इश्क़ का आलम है 'तेज' सब्र-ओ-ताब सा लगता है,

उम्र-ए-रफ़्ता सा हाल अब मेरे प्यार का लगता है..।


                                                     - तेजश्री शिंदे 






Comments

  1. Wonderful line madam kisi apne ko apna na kahena azab sa lgta hai....

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  2. Awesome.... touched my heart

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  3. प्रेमाचा संदेश यातून व्यक्त होतो छान आहे

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  4. Brought smile on face!!!

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  5. Adv. Arunkumar Khedia26 June 2023 at 08:09

    Beautiful

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  6. खूपच छान लिहिलं आहे

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  7. Meaningfull , very nice

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  8. Khup chan aahe

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  9. Very relatable and reminds people of their loved ones from the heart

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  10. खूप छान मस्त

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  11. बढिया लीखा है

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  12. Teju,
    कूछ दीन पेहले ही आपने उर्दू भाषा के बारे मे बात की थी. उर्दू मे अदब हैं नजाकत है ये भी कहा था आपने. आपने आज तूख्म ए इश्क को अल्फाज मे बयान करके, प्यार को एक अलग अंदाज मे अदब और नजकात के साथ पेश किया है. हर लफज कबिल ए तारीफ है. आप तो जोहरी है हर अल्फाज को तराश के गझल को बानाया है. वो मन की जेहमत, वो इश्क का आलम, वो प्यार का हाल, वो आजाब सा खलना, और सब से खास वो इश्क के तूख्म का दिल में जगना.. सब लाजवाब..

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  13. बहोत शुक्रिया अझहर। तुख़्म-ए-इश्क़ को समझना भी जरूरी है। प्यार का बीज (तुख़्म-ए-इश्क़ ) जो पनपता तो हर रूह मैं है.. पर हर बीज पेड़ नहीं बन सकता...उसी तरह हर मोहब्बत मुकम्मल नहीं हो सकती...कुछ अधूरापन एहसासों को जिंदा रखने के काम आता है। 😊

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