पूर्णता.... जो अपूर्णता के सौंदर्य के साथ आती है।



पूर्णता


मैं पूर्णता और अपूर्णता के बीच मैं झूलती हुई चंद्रमा हुँ 

जो कल कल से बढ़ती है पूर्णता की और..

जी लेती है वह एक दिन मानो वो संपूर्ण हो गई हो..!


कुछ अधूरापन हर जगह मेहसूस करोगे..

क्योंकि पूर्णता एक छल है..

आँखों का, एहसासों का, जीवन का..।


हम खोजते रहते है रूहानी ज़ज्बात 

जो उमड़कर बेकाबू हो जाते है..

डालकर पर्दा आपबीती सुनाते है और सच,

गुमसुमसा कोने मैं बैठकर इंतज़ार करता रेहता है,

मानो हम कभी तोह उसे स्वीकार करेंगे ।


यह द्वंद हर एक का आईना है..

जो हम देखकर भी अनदेखा कर रहे है..

मानो अपने अस्तित्त्व को ही झुठला रहे है, 

पूर्णता की आस मैं...।


हाँ..! मैं अपूर्ण हुँ...पूर्णता के आस मैं ।

हाँ..! मैं अपूर्ण हुँ...


                                                      - तेजश्री शिंदे 



- जिंदगी कि कश्मकश में हम सच को झुठलाकर उलझकर रह जाते है । सच को स्विकार करना ही अंतिम सत्य है। हम सभी को पूर्णता  की आस है...लेकिन अपूर्णता मैं भी सौंदर्य है जो मेहसूस कर जीवन को और भी बेहतरीन तरीके से जिया जा सकता है। 




Comments

  1. जीवनाचा अर्थ या कवितेत सामावला आहे.. अपुर्णतेमध्ये देखील सौन्दर्य आहे, सत्याचा स्वीकार करायला हवा..

    कविता वाचत जाऊ तितके याचे खोल अर्थ निघत जातात. नेमके शब्द आणि एकेक शब्दात दडलेला अर्थ..👌👌

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