एहसास-ए-अहबाब ...(गझल)
एहसास-ए-अहबाब न जाने कौन सी इबादत का असर हो तुम, इस सूनी दास्तां का खुशनुमा सफ़र हो तुम। हर ग़ज़ल की तहरीर में ढलता सुखन हो, दोस्ती के पार एक पाक ज़हन हो तुम। जिंदगी के हर तूफां में ठहराव जैसा, हर खुशी के पीछे खुदा का जवाब हो तुम। जो ग़म की चादर को चीर दे हंसी से, मेरे वजूद की सबसे ख़ूबसूरत वजह हो तुम। एहसास-ए-अल्फ़ाज़ यूँ बयां करती है 'तेज' रिश्तों में महकता अहबाब का गुल हो तुम। - तेजश्री शिंदे ✍️ रिश्तों में सब से खूबसूरत रिश्ता होता है दोस्ती का। यह ग़ज़ल दोस्ती के उस अनमोल एहसास को बयां करती है, जो जीवन में स्थिरता, खुशी, और सुकून का स्रोत बनता है। इसमें दोस्त को एक ऐसे शख्स के रूप में दिखाया गया है, जो ग़म और मुश्किलों के बीच भी मुस्कान और उम्मीद की किरण लेकर...