सुंदरता (कविता)
सुंदरता बहुत सुंदर दिखते हो तुम... उस तरह नहीं जैसे सुंदरता बताई जाती है, बल्कि उस तरह जैसे अचानक दिल भर आता है। जैसे किसी हँसी के बीच आँखें भीग जाएँ, और वजह पूछने का मन ही न करे। तुम्हें देखते ही कुछ संभलता नहीं, कुछ बिखरता भी नहीं— बस अंदर कहीं एक हल्की-सी कसक जाग जाती है। तुम बोलते हो तो शब्द नहीं चुभते, धीरे-धीरे मन के कोने में जगह बना लेते हैं। और जब तुम सुनते हो, तो लगता है मेरी हर अधूरी बात पहले से ही तुम्हें पता थी। तुम्हारे पास होने में कोई दावा नहीं, फिर भी दिल खुद को थोड़ा और तुम्हारा मान लेता है। शायद इसलिए तुम्हारी याद कभी बेचैन नहीं करती— बस चुपचाप साथ चलती है। क्या कहूँ... सुंदरता अगर किसी एहसास का नाम है, तो बहुत सुंदर दिखते हो तुम— हर बार जब बिना वजह दिल भर आता है। - तेजश्री शिंदे ✍️